नीचे की तरफ भूरे रंग का ढेर शक्कर का है।और ऊपर चीनी।बहुत से लोगो को चीनी एवम शक्कर का अंतर ही नही पता।लोग चीनी को ही शक्कर समझ लेते हैं।जबकि दोनो में बहुत अंतर है। शक्कर बनाने की प्रक्रिया बिल्कुल गुड़ के समान है।गुड़ का चूर्ण समझ लीजिए। अच्छे स्वास्थ्य के इछुक लोगो के लिए चीनी का बेहतर विकल्प शक्कर है।चीनी बनाने की प्रक्रिया थोड़ी परिष्कृत है।चीनी के रस को बहुत उबलने पर बॉन चारकोल से परिष्कृत किया जाता है।वहीं गन्ने के रस को उबालते रहते हैं बहुत गाढ़ा हो जाने पर गुड़ /शक्कर बनते है।दोनों के गन्ने से बनने बावजूद दोनो के पोषण मूल्य 【nutritional value】में अंतर है।चीनी तुरन्त ऊर्जा देती है। शक्कर देर में ऊर्जा देती है।चीनी की प्रकृति ठंडी होती है।शक्कर की गर्म।दोनो में कैलोरी समान होती है।एक टेबल चम्मच चीनी या शक्कर में समान कैलोरी 【60】होती है।दोनो ही मधुमेह के रोगियो के ठीक नही है।शक्कर में लौह ,एवम अनेक खनिज लवण भी होते हैं।शक्कर या गुड़ हल्के नमकीन भी लगते हैं जिसका कारण है गन्ने के रस में भूमि से प्राप्त खनिज लवण। -राजा हर्षवर्धन के दरबार मे ली पाओ नामक चीनी राजदूत था।चीन के राजा ने राजदूत से कहा कि शक्कर बनाने का फार्मूला भारत से चुरा के लाओ क्योंकि चीनियों की एक बड़ी रकम भारत से शक्कर खरीदने में खर्च होती थी।।राजदूत ले तो आया लेकिन राजा ने कहा कि किसी विधि से इसे ओर परिष्कृत करके क्रिस्टल फॉर्म में लाओ।चीन में शक्कर क्रिस्टलीकरण का आविष्कार हुआ ।इसलिए इसे चीनी कहा जाता है।एक दन्तकथा के अनुसार 12 वी शताब्दी में इटालियन यात्रीमार्को पोलो ने मिस्र【इजिप्ट】में बड़े क्रिस्टल वाली चीनी वहां देखी, उसे ही आज मिश्री कहा जाता है।और वह उसे चीन ले आया।-चीनी के मुकाबले शक्कर में खनिज लवण होते है इसलिए यह बेहतर विकल्प है।मधुमेह के रोगियों के लिए चीनी ,शक्कर समान रूप से हानिकारक है ।मेरे शहर मुज़फ्फरनगर में गुड़ ,शक्कर की विश्व की सबसे बड़ी मंडी है।जिला मुज़फ्फरनगर की 40% जनसंख्या प्रत्यक्ष /अप्रत्यक्ष रूप से चीनी, शक्कर ,गुड़ उद्योग पर आश्रित है ।संयुक्त रूप से इसे खांडसारी उद्योग कहा जाता है।【नोट-ब्राउन सुगर अलग होती है, 】
कम कमर ,चौड़ा सीना हमेशा से पौरुष का प्रतीक रहे हैं ,बॉडीबिल्डिंग प्रतियोगिताओ में पेट का आकार बहुत महत्व रखता है। ९० के दशक के अंत तक ग्रोथ हॉर्मोन एवं इन्सुलिन का प्रयोग कम ही होता था ,आज बॉडीबिल्डिंग में एस्थेटिकस के मायने बदल गए ,जयादा से जयादा साइज और मसल अब मस्क्युलरिटी की परिभाषा हो गयी है। ifbb ने इस गलत ट्रेंड को बहुत बढ़ावा दिया है। डोरियन के समय में GH गट थोड़ा ,थोड़ा दिखने लगा था , अब रोली विंकलार ,फिल हीथ , ब्रांच वारेन ,काय ग्रीन जैसे बॉडीबिल्डर के GH गट [ग्रोथ हारमोन के प्रयोग से बढ़ जाने वाला पेट ] सौंदर्य को चिढ़ाते प्रतीत होते हैं ,बस बॉडीबिल्डरों का साइज़ और वजन बढ़ता जा रहा है। ७० ,८०। ९० के दशक के टॉप बॉडीबिल्डर जैसे आर्नोल्ड ,फ्रैंक जेन ,सर्ज नेबरट ,मुहम्मद मेकावय , ली हनी ,केविन लेवरॉन ,बॉब पेरिस ,ब्रायन बुकनन , शान रे , फ्लेक्स व्हीलर ,फ्रांसिस बान्फ़ेट्टो जैसे बॉडीबिल्डर आज के बॉडीबिल्डरो से बहुत बेहतर दिखते थे। आर्नोल्ड श्वर्जनेगगर ने पिछले आर्नोल्ड क्लासिक प्रतियोगिता में इस भद्दे के बढ़ते ट...

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