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डलास माक्रेवेर -२६ वर्षीय इस बॉडीबिल्डर का सीजन में वजन १३५ किलो था और सम्भवत इन्सुलिन की ओवरडोज से मृत्यु हुयी है। डलास ,पिछले साल सबसे बड़े बॉडीबिल्डिंग कम्पीटिशन मिस्टर ओलिम्पिया में आठवे स्थान पर था ,जो कि एक बड़ी उपलब्धि है।


इस हफ्ते २ प्रसिद्ध बॉडीबिल्डर अकाल मौत मर गए। पहला है डलास माक्रेवेर -२६ वर्षीय इस बॉडीबिल्डर का सीजन में वजन १३५ किलो था और सम्भवत इन्सुलिन की ओवरडोज से मृत्यु हुयी है। डलास ,पिछले साल सबसे बड़े बॉडीबिल्डिंग कम्पीटिशन मिस्टर ओलिम्पिया में आठवे स्थान पर था ,जो कि एक बड़ी उपलब्धि है। दूसरा लोकप्रिय बॉडीबिल्डर जिसकी कल मृत्यु हुयी वह है रिच पायने ,रिच के इंस्टाग्राम पर ११ लाख फॉलोवर हैं और वह भूतपूर्व मिस्टर कैलिफोर्निया है। रिच पायने की उम्र ४६ साल थी ,मृत्यु का कारण स्टेरॉयड 

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चीनी का बेहतरीन विकल्प -शक़्कर

नीचे की तरफ भूरे रंग का ढेर शक्कर का है।और ऊपर चीनी।बहुत से लोगो को चीनी एवम शक्कर का अंतर ही नही पता।लोग चीनी को ही शक्कर समझ लेते हैं।जबकि दोनो में बहुत अंतर है। शक्कर बनाने की प्रक्रिया बिल्कुल गुड़ के समान है।गुड़ का चूर्ण समझ लीजिए। अच्छे स्वास्थ्य के इछुक लोगो के लिए चीनी का बेहतर विकल्प शक्कर है।चीनी बनाने की प्रक्रिया थोड़ी परिष्कृत है।चीनी के रस को बहुत उबलने पर बॉन चारकोल से परिष्कृत किया जाता है।वहीं गन्ने के रस को उबालते रहते हैं बहुत गाढ़ा हो जाने पर गुड़ /शक्कर बनते है।दोनों के गन्ने से बनने बावजूद दोनो के पोषण मूल्य 【nutritional value】में अंतर है।चीनी तुरन्त ऊर्जा देती है। शक्कर देर में ऊर्जा देती है।चीनी की प्रकृति ठंडी होती है।शक्कर की गर्म।दोनो में कैलोरी समान होती है।एक टेबल चम्मच चीनी या शक्कर में समान कैलोरी 【60】होती है।दोनो ही मधुमेह के रोगियो के ठीक नही है।शक्कर में लौह ,एवम अनेक खनिज लवण भी होते हैं।शक्कर या गुड़ हल्के नमकीन भी लगते हैं जिसका कारण है गन्ने के रस में भूमि से प्राप्त खनिज लवण। -राजा हर्षवर्धन के दरबार मे ली पाओ नामक चीनी राजदूत था।चीन के राजा ने राजदूत...
कम  कमर ,चौड़ा सीना हमेशा से पौरुष  का प्रतीक रहे हैं ,बॉडीबिल्डिंग प्रतियोगिताओ में पेट  का आकार बहुत महत्व रखता है। ९० के दशक के अंत तक ग्रोथ हॉर्मोन एवं इन्सुलिन का प्रयोग कम ही होता था ,आज बॉडीबिल्डिंग में एस्थेटिकस के मायने बदल गए ,जयादा से जयादा साइज और मसल अब मस्क्युलरिटी की परिभाषा हो गयी है। ifbb ने इस गलत ट्रेंड को बहुत बढ़ावा दिया है।  डोरियन के समय में GH गट थोड़ा ,थोड़ा दिखने लगा था , अब रोली विंकलार ,फिल हीथ , ब्रांच वारेन ,काय ग्रीन जैसे बॉडीबिल्डर के GH गट  [ग्रोथ हारमोन के प्रयोग से बढ़ जाने वाला पेट ] सौंदर्य को चिढ़ाते प्रतीत होते हैं ,बस बॉडीबिल्डरों का साइज़ और वजन बढ़ता  जा रहा है। ७० ,८०। ९० के दशक के टॉप बॉडीबिल्डर जैसे आर्नोल्ड ,फ्रैंक जेन ,सर्ज नेबरट ,मुहम्मद मेकावय , ली हनी ,केविन लेवरॉन ,बॉब पेरिस ,ब्रायन बुकनन , शान रे , फ्लेक्स व्हीलर ,फ्रांसिस बान्फ़ेट्टो जैसे बॉडीबिल्डर आज के बॉडीबिल्डरो से बहुत बेहतर दिखते  थे।   आर्नोल्ड श्वर्जनेगगर ने पिछले आर्नोल्ड  क्लासिक प्रतियोगिता में इस भद्दे के बढ़ते ट...

मार्केटिंग के फंडे एवं भ्रामक प्रचार

पिछले २० साल से मार्किट में कई ऐसे उत्पाद आ रहे हैं जिनके चमत्कारी होने का दावा किया जाता है ,निसंदेह वैज्ञानिक अनुसन्धान के कारन ऐसी अनेक वनस्पतियों की खोज हो  रही है जिनके विषय में पहले नहीं पता था लेकिन व्यापारी लोग इन्हे अतीव चमत्कारी बता कर बेच रहे हैं। इस लिस्ट में बहुत नाम है। स्प्रीलूना नामक समुद्री काई जिसमे प्रोटीन की उच्च मात्रा बताई गयी थी एक जमाने में खूब बिकी। हर महीने ऐसी चमत्कारी हर्बस के बारे में पता चल रहा है कि जो तेजी से फैट घटाती हैं या स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक हैं। ऐसे उत्पादों के छोटे छोटे लक्षणों को वयापारी बढ़ा चढ़ा कर बताते हैं जैसे कि इसमें इतने mcg आयरन है ,इतने mcg थायमिन या अन्य विटामिन हैं। जगत में कोई वनस्पति ऐसी नहीं जिसमे कोई पोषक तत्व न हो। कुछ खोज निसंदेह चमत्कारी हैं लेकिन प्रोपगेंडा के प्रभाव में आकर ऐसे हर्बल प्रोडक्ट खरीदने से बचे। पहले स्वयं रिसर्च करे कि इसकी क्या प्रॉपर्टी है। ऐसे जयादातर प्रोडक्ट फैट घटाने के नाम पर बेचे जा रहे हैं ,सलाह लेकर या स्वयं शोध करके ही ले।