कम कमर ,चौड़ा सीना हमेशा से पौरुष का प्रतीक रहे हैं ,बॉडीबिल्डिंग प्रतियोगिताओ में पेट का आकार बहुत महत्व रखता है। ९० के दशक के अंत तक ग्रोथ हॉर्मोन एवं इन्सुलिन का प्रयोग कम ही होता था ,आज बॉडीबिल्डिंग में एस्थेटिकस के मायने बदल गए ,जयादा से जयादा साइज और मसल अब मस्क्युलरिटी की परिभाषा हो गयी है। ifbb ने इस गलत ट्रेंड को बहुत बढ़ावा दिया है। डोरियन के समय में GH गट थोड़ा ,थोड़ा दिखने लगा था , अब रोली विंकलार ,फिल हीथ , ब्रांच वारेन ,काय ग्रीन जैसे बॉडीबिल्डर के GH गट [ग्रोथ हारमोन के प्रयोग से बढ़ जाने वाला पेट ] सौंदर्य को चिढ़ाते प्रतीत होते हैं ,बस बॉडीबिल्डरों का साइज़ और वजन बढ़ता जा रहा है। ७० ,८०। ९० के दशक के टॉप बॉडीबिल्डर जैसे आर्नोल्ड ,फ्रैंक जेन ,सर्ज नेबरट ,मुहम्मद मेकावय , ली हनी ,केविन लेवरॉन ,बॉब पेरिस ,ब्रायन बुकनन , शान रे , फ्लेक्स व्हीलर ,फ्रांसिस बान्फ़ेट्टो जैसे बॉडीबिल्डर आज के बॉडीबिल्डरो से बहुत बेहतर दिखते थे। आर्नोल्ड श्वर्जनेगगर ने पिछले आर्नोल्ड क्लासिक प्रतियोगिता में इस भद्दे के बढ़ते ट...
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